पति की बिगड़ी तबियत तो परिवार का बनीं सहारा:टेराकोटा की ज्वेलरी से बनाई पहचान, गोरखपुर की सुनीता ने 500 महिलाओं को दिया रोजगार
गोरखपुर की रहने वाली सुनीता मौर्या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सैकड़ों महिलाओं को सशक्त बना चुकी हैं। 7 साल पहले पति की तबियत बिगड़ने पर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी। तभी से उन्होंने अपने हुनर का इस्तेमाल कर बैग सिलकर बेचने का काम किया। धीरे- धीरे उन्होंने अपनी जैसी जरूरतंद महिलाओं को साथ जोड़कर ग्रुप बनाया।

गोरखपुर की रहने वाली सुनीता मौर्या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सैकड़ों महिलाओं को सशक्त बना चुकी हैं। 7 साल पहले पति की तबियत बिगड़ने पर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी। तभी से उन्होंने अपने हुनर का इस्तेमाल कर बैग सिलकर बेचने का काम किया। धीरे- धीरे उन्होंने अपनी जैसी जरूरतंद महिलाओं को साथ जोड़कर ग्रुप बनाया। उसके बाद उनकी रूचि के हिसाब से सभी को ट्रेनिंग देना शुरू की। आज समूह से 500 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं, जो अपने पैरों पर खड़ी हैं और परिवार संभाल रही। कोई अचार का कारोबार करता है, किसी ने पार्लर खोली है, कोई बुटीक चलाता है तो कोई टेराकोटा की ज्वेलरी और अन्य सामान बनाकर बाजार तक पहुंचाती है। 7 से 8 ज्वेलरी से किया शुरुआत
सुनीता ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्होंने टेराकोटा की 7- 8 ज्वेलरी बनाई थी। जिसे एक एग्जीबिशन में बैग की स्टॉल पर लगाया। लोगों ने उसे बहुत पसंद किया। पूरी सेल हो गई। तबसे उन्होंने और ज्वेलरी बनाना शुरू किया। समूह में जुड़ी कुछ महिलाओं को भी ट्रेनिंग देने के बाद उनसे घर से ही काम लेना शुरू किया। महिलाएं मिट्टी से मोती और अलग- अलग डिजाइंस के शेप काटकर देने लगी। उनकी मदद से बड़ी मात्रा में ज्वेलरी बनाना शुरू किया। लोगों को हमारा काम बहुत आया और उन्होंने ज्यादा से ज्यादा ऑर्डर देना शुरू किया। UP ट्रेड शो में 1000 पीस से ऊपर बेचा
उन्होंने बताया कि UP ट्रेड शो में भी उन्होंने अपनी स्टॉल लगाई जहां 1000 पीस से ऊपर की ज्वेलरी बिकी। उनके काम की बारीकी और फिनिशिंग को आसपास ही नहीं बल्कि देश- विदेश के लोग भी बहुत ज्यादा पसंद करते हैं। कस्टमर्स की पसंद के हिसाब से ज्वेलरी कस्टमाइज भी की जाती है। फ्लिपकार्ड पर भी अवेलेबल
सुनीता ने बताया कि हमने अपने मेहनत को सीमित नहीं रखा है। पिछले एक साल से हमारा प्रोडक्ट फ्लिपकार्ड जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। जहां से बराबर ऑर्डर मिलते रहते हैं। इससे हमारा और समूह से जुड़ी महिलाओं का हौसला बढ़ता है। एक महीने से 50 हजार से ऊपर की कमाई
उन्होंने बताया कि इस बिजनेस से हम महीने में 50 हजार से ऊपर की कमाई करते हैं। जिसमें महिलाओं को भी हर महीने 3,000 से ऊपर चार्ज देते हैं। उनकी कमाई उनके काम के ऊपर निर्भर है। कई बार एक महिला की 9,000 रुपए तक पेमेंट बन जाता है। मुंबई में लगेगा स्टॉल
उन्होंने बताया कि आगे चलकर कई एग्जीबिशन के लिए बुकिंग की गई है। शहर में कई जगह तो है ही मुंबई में भी एक जगह स्टॉल बुक किया है। उम्मीद है कि वहां भी रिस्पांस मिलता है। सुनीता के परिवार में उनके पति, तीन बच्चे और मां हैं। सभी की जिम्मेदार उनके कंधों पर ही है। उनकी बिजनेस में बड़ी बेटी रितिका भी हर तरह से साथ देती है और काम में पूरी तरह जुड़ी हैं और पढ़ाई भी करती हैं।
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