3 अक्टूबर 2026, 11:54 AM
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पोता जीता तो 98 साल की दादी ने डांस किया:अलीगढ़ के गुलवीर को एशियन गेम्स में सिल्वर मिला, दादी बोलीं-गांव आएगा तो फिर नाचूंगी

अलीगढ़ के एथलीट गुलवीर सिंह ने जापान में हो रहे एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता है। शनिवार को पोते की इस उपलब्धि की खबर सुनकर उनकी 98 साल की दादी गेंदो देवी खुशी से झूम उठीं। वह इतनी नाचीं कि कुछ देर बाद उनकी सांस फूलने लगी। गेंदो देवी ने कहा- अब शरीर में वो करंट नहीं रहा, ताकत भी नहीं रही। लेकिन मेरा गोलू ज

पोता जीता तो 98 साल की दादी ने डांस किया:अलीगढ़ के गुलवीर को एशियन गेम्स में सिल्वर मिला, दादी बोलीं-गांव आएगा तो फिर नाचूंगी
स्रोत: dainik bhasker category
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अलीगढ़ के एथलीट गुलवीर सिंह ने जापान में हो रहे एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता है। शनिवार को पोते की इस उपलब्धि की खबर सुनकर उनकी 98 साल की दादी गेंदो देवी खुशी से झूम उठीं। वह इतनी नाचीं कि कुछ देर बाद उनकी सांस फूलने लगी। गेंदो देवी ने कहा- अब शरीर में वो करंट नहीं रहा, ताकत भी नहीं रही। लेकिन मेरा गोलू जब गांव आएगा तो मैं फिर नाचूंगी। गुलवीर अलीगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर सिरसा गांव के रहने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियन गेम्स में 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था। अब परिवार की नजर गुलवीर की अगली दो दौड़ों पर है। उनके बड़े भाई मोनू ने बताया कि गुलवीर की अभी दो दौड़ बाकी हैं। हमें उम्मीद है कि इस बार भाई गोल्ड मेडल जीतकर गांव लौटेगा। 10 महीने से गांव नहीं आया, अक्टूबर में घर लौटने की उम्मीद गुलवीर एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता पप्पू सिंह खेती करते हैं। तीन भाइयों में गुलवीर सबसे छोटे हैं। उनसे बड़े नरेश और मोनू हैं। गुलवीर की पत्नी बबिता हैं। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी परी ढाई साल की है, जबकि छोटी बेटी सावी अभी 6 महीने की है। परिवार के मुताबिक, गुलवीर करीब 10 महीने से गांव नहीं आए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स की तैयारी के चलते उसका ज्यादातर समय ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में बीता। गुलवीर की कामयाबी से मां लक्ष्मी देवी और दादी गेंदो देवी बेहद खुश हैं। परिवार को उम्मीद है कि एशियन गेम्स के बाद अक्टूबर में वह गांव लौट सकता है। खेल के लिए इतना समर्पण, बहन की शादी में भी नहीं पहुंचे गुलवीर के खेल के प्रति समर्पण की कहानी परिवार के त्याग से भी जुड़ी है। इसी साल फरवरी में उनकी बहन की शादी थी, लेकिन गुलवीर शादी में शामिल नहीं हो सके। बहन को दुख न हो, इसलिए गुलवीर फोन पर उसे भरोसा दिलाते रहे कि वह शादी में आ रहे हैं। कभी कहते कि फ्लाइट में हैं, तो कभी रास्ते में होने की बात कहते। परिवार भी बहन को यही बताता रहा। लेकिन बहन की विदाई तक गुलवीर नहीं पहुंच सके। बाद में परिवार ने उसे बताया कि गुलवीर खेल की तैयारी और प्रतियोगिताओं में व्यस्त हैं। इसी वजह से वह शादी में शामिल नहीं हो पाए। दादी ने कहा कि इस बार पोते के गांव आने पर वह फिर खुशी से नाचेंगी। कभी डकैतों के गांव के नाम से जाना जाता था, अब धावक से पहचान सिरसा गांव की पहचान अब बदल रही है। एक समय यह गांव डकैतों के गांव के नाम से जाना जाता था। अब अंतरराष्ट्रीय धावक गुलवीर सिंह गांव की नई पहचान बन गए हैं। गुलवीर की सफलता से गांव के बच्चों में भी खेल को लेकर उत्साह बढ़ा है। कई बच्चे अब उनकी तरह एथलीट बनने का सपना देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर का धावक दिया है, वहां खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए भी अच्छी सुविधाएं होनी चाहिए। …………………………. ये खबर भी पढ़ें- कानपुर कारोबारी हत्याकांड, मां ने कहा था- इनका कुछ करो:अय्याशी से परेशान बेटे ने हत्या कराई; अब करोड़ों का व्यापार कौन संभालेगा? करोड़पति परिवार। परिवार में कलह और अविश्वास। पिता-बेटे के बीच बढ़ती दूरी। यह कहानी कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड से जुड़ी है। पुलिस की जांच में परिवार के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान की कई परतें सामने आई हैं। पढ़ें पूरी खबर
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