2 अक्टूबर 2026, 10:16 AM
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प्रशांत किशोर का 'मिशन' अब दिल्ली? PK बोले- 'हम लोगों ने…'

जन सुराज के संस्थापक और पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक प्रशांत किशोर रविवार (27 सितंबर, 2026) को दिल्ली में थे. उनके इस दौरे और यहां की गई मीटिंग से पार्टी के दिल्ली में विस्तार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

प्रशांत किशोर का 'मिशन' अब दिल्ली? PK बोले- 'हम लोगों ने…'
स्रोत: abp news world
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जन सुराज के संस्थापक और पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक प्रशांत किशोर रविवार (27 सितंबर, 2026) को दिल्ली में थे. उनके इस दौरे और यहां की गई मीटिंग से पार्टी के दिल्ली में विस्तार को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. 

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने दिल्ली दौरे पर कहा, "अगर दिल्ली में हमें आना भी होगा तो उसके लिए बहुत लंबी तैयारी होगी. बहुत विचार करने के बाद हम ऐसा करेंगे... कम से कम 6 महीने का समय हम लोग लेंगे ताकि दिल्ली में जो लोग हमसे जुड़े हैं, उनसे हम बात विचार करें… दल बिहार में है, इसलिए किसी दूसरी जगह जाकर दूसरी यूनिट शुरू कर दें, ऐसी न हमारी सोच रही है और न आगे कभी होगी."

मिलने के लिए था दबाव: प्रशांत किशोर

इससे पहले प्रशांत किशोर ने कहा, "...विषय ये है कि बिहार के बाहर जन सुराज को चाहने वाले, उससे जुड़े सबसे ज्यादा संख्या में जो लोग हैं, वह दिल्ली में है. यहां से लोग जाकर वहां हमसे मिलते हैं, बात करते हैं. कई दिनों से दबाव था कि मैं उनसे मिलूं और उस संदर्भ में ही मैं यहां आया हूं."

मीडिया से बातचीत में कहा, "चर्चा केवल इस बात की है कि जो लोग जन सुराज के विचार से या बिहार में हमारे द्वारा शुरू प्रयास से जुड़े हैं, उनकी भूमिका आगे क्या होगी? अभी हम लोगों ने NRB (नॉन रेजिडेंट बिहारी) चैप्टर करके दिल्ली में इसे संगठित किया है... एक चर्चा हम लोग कर रहे हैं कि उन्हें कैसे व्यवस्थित किया जाए या उनकी आशा व अपेक्षा क्या है..."

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मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी किया हमला

प्रशांत किशोर ने ECI विवाद पर कहा, "...चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसकी साख, एक इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से प्रभावित नहीं हुई है... पूरे देश में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि पूर्व CEC आज देश के सबसे बड़े निजी बैंक के चेयरमैन कैसे बन गए?  पिछले कई वर्षों से जो चुनाव आयोग की कार्यशैली है, जिस तरह से वे चुनाव के दौरान या चुनाव से अलग भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं, उस वजह से उनकी साख पर बट्टा लगा है. ये चर्चा पिछले 10 साल से चल रही है... चुनाव की तिथि तय की जाती है, जितने चरणों में चुनाव करवाए जाते हैं, उस सब पर सत्तारूढ़ दल, बीजेपी का प्रभाव दिखता है..." 

आगे कहा, "इंडियन एक्सप्रेस की जो रिपोर्ट आई है, उससे इस पूरी चर्चा को बल मिला है लेकिन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से ही बात नहीं बनेगी, सुधार की जरूरत है... पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी करने के लिए व्यापक कदम उठाए जाने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की इसमें भूमिका होनी चाहिए..."

पीके ने कहा, "जब बूथ पर वोट पड़ता है, फॉर्म-17, राजीव कुमार से मैंने मिलकर भी कहा था कि फॉर्म-17 को सार्वजनिक कर देना चाहिए ताकि पता चलता रहे कि कितना मतदान हो रहा है... जिस तरह से चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जा रहे हैं, जिस तरह की चुनाव की भूमिका होती है, उसमें विपक्ष की कोई भूमिका नहीं है...विरोधी वही चुनाव जीत पा रहे हैं कि जहां बीजेपी के खिलाफ आंधी है..." 

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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