2 अक्टूबर 2026, 11:29 AM
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बृजभूषण पर यौन शोषण का केस फिर चल सकता है:MP/MLA कोर्ट ने नोटिस भेजा, महिला पहलवानों ने दोबारा शिकायत की थी

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दोबारा केस चल सकता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यौन शोषण मामले में बृजभूषण को 3 अगस्त को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ महिला पहलवानों ने 25 सितंबर को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट (MP/MLA) में याचिका डाली थी। बृजभूषण और विनोद कुमार तोमर के खिलाफ डाली गई याचिका को

बृजभूषण पर यौन शोषण का केस फिर चल सकता है:MP/MLA कोर्ट ने नोटिस भेजा, महिला पहलवानों ने दोबारा शिकायत की थी
स्रोत: dainik bhasker category
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भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दोबारा केस चल सकता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यौन शोषण मामले में बृजभूषण को 3 अगस्त को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ महिला पहलवानों ने 25 सितंबर को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट (MP/MLA) में याचिका डाली थी। बृजभूषण और विनोद कुमार तोमर के खिलाफ डाली गई याचिका को कोर्ट ने स्वीकार किया है। साथ ही दोनों को नोटिस भेजा है। मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। इससे पहले दोनों को बरी करते समय कोर्ट ने कहा था कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। शिकायतकर्ताओं की कई बातें मेल नहीं खातीं। वहीं, महिला पहलवानों ने अपील में कहा है कि निचली अदालत का फैसला सही नहीं है। इसमें सबूतों का गलत आकलन किया गया। बृजभूषण ने पहलवानों की याचिका के बाद फोन पर दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था- मैंने फैसले वाले दिन ही कहा था, जहां जाना चाहें वहां चली जाएं। केस में कोई सच्चाई नहीं है। 2023 में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न का मामला 2023 में सामने आया था। 6 महिला पहलवानों ने उन पर आरोप लगाए थे। इनमें एक पहलवान नाबालिग थी। FIR नहीं होने पर पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अप्रैल, 2023 में बृजभूषण पर FIR दर्ज की गई। बाद में नाबालिग पहलवान ने शिकायत वापस ले ली थी। 127 सुनवाई और 32 गवाही के बाद आया फैसला बृजभूषण 20 जुलाई, 2023 से नियमित जमानत पर थे। 10 मई, 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ था। 2 जुलाई, 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में कुल 1133 दिनों में 127 सुनवाई हुईं। 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 3 अगस्त को बरी होने के बाद बृजभूषण ने कहा था- जज ने कहा कि बृजभूषण और विनोद तोमर आप लोगों को बाइज्जत बरी किया जाता है। मैंने पहले कहा था कि अगर कोई आरोप साबित हो जाएगा तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। मेरे लिए खुशी का दिन है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। 9 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के सेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। स्पेशल जज दिगविनय सिंह की अदालत ने महिला पहलवानों की अपील एक्सेप्ट कर ली है। पहले ये सुनवाई 26 सितंबर को होनी थी, लेकिन जज के न आने के कारण सुनवाई टल गई थी। कोर्ट ने बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। जवाब पर अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। बृजभूषण शरण सिंह के अधिवक्ता ऋषभ भाटी ने बताया कि कोर्ट ने पहलवानों की अपील स्वीकार कर ली है। अदालत ने हमें नोटिस जारी करके इस अपील पर जवाब मांगा है। इस पूरे मामले की सुनवाई एमपी/एमएलए सेशन कोर्ट में हो रही है। सेशन कोर्ट में मामला होने के कारण सुनवाई में ज्यादा समय नहीं लगेगा। उम्मीद है कि जल्द ही सुनवाई पूरी हो जाएगी और फैसला भी आ जाएगा। याचिका में महिला पहलवानों ने ये तर्क गिनाए… फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित महिला पहलवानों ने याचिका में कहा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसमें रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। निचली अदालत का फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है। इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया। सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन नहीं फैसले में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित’ व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया, जबकि पीड़िताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन किया जाना चाहिए था। बृजभूषण बोले- उन्हें ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार बृजभूषण शरण सिंह ने 25 सितंबर को दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- हमने फैसले वाले दिन कहा था कि जहां जाना चाहें वहां जाएं। मामले में कोई सच्चाई नहीं है। उनको (महिला पहलवानों) हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए पूरी छूट मिली है। ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार है। मुझे भी ऊपरी अदालत में जाने का मौका मिलता, लेकिन मैं बरी हो गया हूं। अब पढ़िए, निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा था… पीड़ित पहलवानों का लंबे समय तक चुप रहना, आरोपी के साथ लगातार अच्छे रिश्ते बनाए रखना, बयानों में विरोधाभास होना- ऐसी बातें हैं जो सरकारी पक्ष के दावे पर संदेह पैदा करती हैं। रिकॉर्ड में ऐसी कई तस्वीरें मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को पहलवानों के पारिवारिक कार्यक्रमों और शादियों तक में बुलाया गया था। कोर्ट ने यह तो माना था कि बृजभूषण के WFI अध्यक्ष रहते हुए महिला पहलवानों को करियर खराब होने का डर हो सकता था, लेकिन यह बात समझ से परे है कि उन्होंने सालों तक उनके साथ दोस्ताना और अच्छे संबंध क्यों बनाए रखे। इन आधारों पर ACJM अदालत ने कहा था कि पुलिस आरोपों को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रही, इसलिए बृजभूषण सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A और 506(1) के तहत बरी कर दिया गया। साथ ही, पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया गया। विनेश फोगाट ने कहा था- हमने उम्मीद नहीं छोड़ी बृजभूषण को बरी किए जाने पर विनेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था- "हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं। पर कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहीं। हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना। शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।" फैसला आते ही चुनौती देने की कही थी बात फैसले के 53 दिन बाद महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी है। पहलवानों ने 3 अगस्त को ही ऊपरी अदालत जाने की बात कही थी, जिसके लिए कोर्ट ने उन्हें समय दिया था। सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह, विनोद तोमर और वकील मौजूद रहेंगे। कोर्ट प्राइमरी स्टेज पर खारिज हो सकता था केस वरिष्ठ अधिवक्ता बृजलाल तिवारी ने बताया कि कोर्ट के सामने सभी विकल्प खुले रहते हैं; जब कोई पक्ष किसी निर्णय से संतुष्ट नहीं होता, तो वह अपील में जाता है। पहलवान भी इसी कारण अदालत गए हैं। यदि अदालत उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से संतुष्ट होती है तो वह याचिका को स्वीकार करती है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, वरुण गांधी जा सकते हैं राज्यसभा:अक्टूबर में होगी घोषणा; मौजूदा 4 सदस्यों को फिर मिल सकता है टिकट राज्यसभा में यूपी कोटे से 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा को 8 और सपा को 2 सीटें मिलना तय है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में भाजपा अपने प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें, तो हाल ही में राष्ट्रीय संगठन में पद पाने वाले दो बड़े चेहरों- पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का यूपी से राज्यसभा जाना लगभग तय हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें
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