बृजभूषण बोले- कोर्ट जाना उनका अधिकार, मामले में सच्चाई नहीं:महिला पहलवानों ने दी है फैसले को चुनौती, सुनवाई 28 सितंबर को
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवान फिर से कोर्ट पहुंच गई हैं। शुक्रवार (25 सितंबर) को यौन शोषण केस में चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दाखिल की है। मामले की सुनवाई आज यानी शनिवार को स्पेशल जज दिगविनय सिंह की अदालत में होनी थी। लेकिन जज के किसी कार्यक्रम मे

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवान फिर से कोर्ट पहुंच गई हैं। शुक्रवार (25 सितंबर) को यौन शोषण केस में चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दाखिल की है। मामले की सुनवाई आज यानी शनिवार को स्पेशल जज दिगविनय सिंह की अदालत में होनी थी। लेकिन जज के किसी कार्यक्रम में जाने के कारण ये सुनवाई टल गई। अब 28 सितंबर को सुबह 11:00 बजे सुनवाई होगी। बृजभूषण शरण सिंह दिल्ली में हैं और उन्होंने फोन पर दैनिक भास्कर से बात की। उन्होंने कहा- जिस दिन फैसला आया था मैंने उसी दिन कह दिया था कि जहां जाना चाहें वहां चली जाएं। इस मामले में कोई सच्चाई नहीं है। 2023 में पहली बार लगे थे यौन उत्पीड़न के आरोप यह मामला 2023 में सामने आया था। 6 महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसमें एक नाबालिग थी। FIR नहीं होने पर पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अप्रैल 2023 में FIR दर्ज की गई। बाद में नाबालिग पहलवान ने शिकायत वापस ले ली थी। 127 सुनवाई और 32 गवाही के बाद आया था फैसला बृजभूषण 20 जुलाई, 2023 से नियमित जमानत पर थे। 10 मई, 2024 को अदालत ने दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर आरोप तय किए थे, जिसके बाद ट्रायल शुरू हुआ था। 2 जुलाई, 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में कुल 1133 दिनों में 127 सुनवाई हुईं। 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 3 अगस्त को कोर्ट ने बृजभूषण को बरी कर दिया। फैसले के बाद बृजभूषण ने कहा- जज ने कहा कि बृजभूषण और विनोद तोमर आप लोगों को बाइज्जत बरी किया जाता है। मैंने पहले कहा था कि अगर कोई आरोप साबित हो जाएगा तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। मेरे लिए खुशी का दिन है। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। याचिका में महिला पहलवानों ने ये तर्क गिनाए… फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित महिला पहलवानों ने याचिका में कहा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। इसमें रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों का स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया है। निचली अदालत का फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है। इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया। सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन नहीं फैसले में यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित’ व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया गया, जबकि पीड़िताओं की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबूतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक आकलन किया जाना चाहिए था। बृजभूषण बोले- उन्हें ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार बृजभूषण शरण सिंह इस समय दिल्ली में हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे फोन पर बात की। उन्होंने कहा- जिस दिन फैसला आया था हमने उसी दिन कहा था कि वो जहां जाना चाहें वहां जाएं। इस पूरे मामले में कोई सच्चाई नहीं है। उनको (महिला पहलवानों) हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए पूरी छूट मिली है। ऊपरी अदालत में जाने का उनको अधिकार है। मुझे भी ऊपरी अदालत में जाने का मौका मिलता अगर मेरे खिलाफ मामला होता, लेकिन मैं बरी हो गया हूं। पढ़िए निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा था… इन आधारों पर ACJM अदालत ने कहा था कि पुलिस आरोपों को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रही, इसलिए बृजभूषण सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A और 506(1) के तहत बरी कर दिया गया। साथ ही, पूर्व सचिव विनोद तोमर को भी बरी कर दिया गया। पहलवान विनेश फोगाट ने कहा था- हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है बृजभूषण को बरी किए जाने पर विनेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा था- "हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं। पर कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहीं। हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना। शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है।" फैसला आते ही चुनौती देने की कही थी बात फैसले के 53 दिन बाद महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी है। पहलवानों ने 3 अगस्त को ही ऊपरी अदालत जाने की बात कही थी, जिसके लिए कोर्ट ने उन्हें समय दिया था। सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह, विनोद तोमर और वकील मौजूद रहेंगे। कोर्ट प्राइमरी स्टेज पर खारिज कर सकती है केस वरिष्ठ अधिवक्ता बृजलाल तिवारी ने बताया कि कोर्ट के सामने सभी विकल्प खुले रहते हैं; जब कोई पक्ष किसी निर्णय से संतुष्ट नहीं होता, तो वह अपील में जाता है और पहलवान भी इसी कारण अदालत गए हैं। यदि अदालत उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से संतुष्ट होती है तो वह याचिका को स्वीकार करेगी। मामला अगर बेदम लगा तो उसे प्राइमरी स्टेज पर ही खारिज कर दिया जाएगा। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… बृजभूषण के खिलाफ फिर 4 महिला पहलवान कोर्ट पहुंचीं:बोलीं- निचली अदालत ने सबूत नजरअंदाज किए, पूर्व सांसद 53 दिन पहले बरी हुए थे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की एक बार फिर मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को यौन शोषण केस में चार महिला पहलवानों ने दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपील दाखिल की है। पढ़ें पूरी खबर…
समाचार स्रोत
यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
मूल स्रोत देखें ↗
