2 अक्टूबर 2026, 11:29 AM
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बांदा में कबीर गद्दी विवाद, संतों ने महापंचायत की:एक महीने में कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य स्तरीय आंदोलन की दी चेतावनी

सद्गुरु कबीर गद्दी नगवा से जुड़े संतों ने गद्दी और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर बांदा में एक महापंचायत की है। संतों ने रविशंकर द्विवेदी पर गद्दी पर कब्जा करने और साधु-संतों को वहां से हटाने का आरोप लगाया है। संतों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को एक महीने का समय देते हुए कार्रवाई की मांग की है। संत गौरी दास ने बताया कि 20 फरवरी को

बांदा में कबीर गद्दी विवाद, संतों ने महापंचायत की:एक महीने में कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य स्तरीय आंदोलन की दी चेतावनी
स्रोत: Dainik Bhaskar Uttar Pradesh
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सद्गुरु कबीर गद्दी नगवा से जुड़े संतों ने गद्दी और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर बांदा में एक महापंचायत की है। संतों ने रविशंकर द्विवेदी पर गद्दी पर कब्जा करने और साधु-संतों को वहां से हटाने का आरोप लगाया है। संतों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को एक महीने का समय देते हुए कार्रवाई की मांग की है। संत गौरी दास ने बताया कि 20 फरवरी को महंत के निधन के बाद से गद्दी को लेकर विवाद चल रहा है। उनका आरोप है कि रविशंकर द्विवेदी गद्दी पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। संतों का कहना है कि गद्दी कबीरपंथ की परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार साधु-संतों को मिलनी चाहिए। लेकिन, इसे परिवारवाद के जरिए किसी और व्यक्ति को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इसी मामले को लेकर बांदा में यह महापंचायत हुई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। महापंचायत के बाद संतों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को अपनी मांगों और शिकायतों की जानकारी दी। उन्होंने एक महीने में उचित कार्रवाई करने का अल्टीमेटम भी दिया। दूसरे पक्ष का समर्थन करने का आरोप संत गौरी दास ने कहा कि अगर एक महीने के भीतर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो संत आगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गद्दी से जुड़ी जमीन और संपत्ति के भविष्य को लेकर भी संतों को चिंता है। इसे बचाने के लिए वे आंदोलन कर रहे हैं। संत ने बताया कि फिलहाल गद्दी परिसर में करीब पांच साधु मौजूद हैं। वहीं, उन्होंने दूसरे पक्ष की ओर से दो-तीन लोगों के सक्रिय होने की बात कही। कुछ ग्रामीणों पर भी दूसरे पक्ष का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। संतों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन से मामले में दखल देकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर दूसरे पक्ष का बयान अभी सामने नहीं आया है। प्रशासन की तरफ से भी मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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