2 अक्टूबर 2026, 3:29 PM
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बिहार की पहली महिला जो संभालेंगी विदेशी जहाज, कौन हैं कैप्टन रितु?

कैप्टन रितु कुमारी विदेशी जहाज की कमान संभालेंगी. विदेश जाने वाले जहाजों में वे बिहार की पहली महिला कैप्टन बन गई हैं. रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के इतिहास में पहली महिला मास्टर बनीं और मर्चेंट नेवी टैंकर, एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला बनीं.

बिहार की पहली महिला जो संभालेंगी विदेशी जहाज, कौन हैं कैप्टन रितु?
स्रोत: abp news world
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कैप्टन रितु कुमारी विदेशी जहाज की कमान संभालेंगी. विदेश जाने वाले जहाजों में वे बिहार की पहली महिला कैप्टन बन गई हैं. रितु कुमारी ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के इतिहास में पहली महिला मास्टर बनीं और मर्चेंट नेवी टैंकर, एमटी जग पवित्रा की कमान संभालने वाली बिहार की दूसरी महिला बनीं.

इस मौके पर कैप्टन रितु कुमारी ने कहा, "भारत में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया कंपनी में काफी महिलाएं आ गई हैं, लेकिन बिहार से मैं दूसरी हूं. विदेश जाने वाले जहाजों में मैं बिहार की पहली महिला कैप्टन हूं."

'अभी भी कम संख्या में पहुंचीं महिलाएं'

रितु ने कहा क यदि पूरे समुद्री क्षेत्र की बात करें तो इसमें महिलाओं की भागीदारी केवल दो प्रतिशत है. कैप्टन और मुख्य अधिकारी जैसे शीर्ष पदों पर और चीफ इंजीनियर, सेकंड इंजीनियर जैसे तकनीकी पदों पर अभी भी बहुत कम संख्या में महिलाएं पहुंच पाई हैं.

आनंद सर के यहां भी कर चुकी हैं पढ़ाई

पढ़ाई और करियर को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी. कहा कि उन्हें शुरुआत में इस क्षेत्र के बारे में जानकारी नहीं थी. वे आनंद सर (पटना वाले) के यहां ट्यूशन करती थीं, जहां सुपर-30 बैच चलता था. वहां सीनियर्स ने बताया कि आईआईटी के अलावा भी विकल्प है, जबकि उस समय लोग केवल आईआईटी के बारे में ही जानते थे.

रित ने कहा, "सीनियर्स ने बताया कि यदि आईआईटी में रैंक पीछे भी आती है तो यह एक विकल्प है, इसका अलग से फॉर्म भरना होता है, और कोई अलग परीक्षा नहीं देनी पड़ती, चयन आईआईटी के परिणाम से ही होता है. वहीं से मेरा चयन हुआ."

आईआईटी के माध्यम से हुआ चयन

कैप्टन रितू ने कहा कि उनका चयन आईआईटी के माध्यम से हुआ है. वह बहुत खुश थीं. काउंसलिंग के लिए गईं तो आईआईटी के जरिए तीन कॉलेजों में दाखिला होता था, दो मुंबई में और एक कोलकाता में, वह काउंसलिंग के लिए गईं. तब भी महिला उम्मीदवार के तौर पर उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी. उन्होंने केवल यह देखा कि मुंबई में रहने की इच्छा थी और टीएस चाणक्य मुंबई में था, जो बीएससी नॉटिकल साइंस का तीन साल का कोर्स कराता था.

नवोदय विद्यालय से हुई पढ़ाई

उन्होंने कहा, "मैंने सोचा कि पहले सभी दोस्त बीटेक कर रहे हैं जिसमें चार साल लगते हैं, मेडिकल में भी समय लगता है. वहां पढ़ाई कम और अतिरिक्त गतिविधियां ज्यादा थीं. सुबह पीटी, दिन भर खेल, स्विमिंग की सुविधा थी, जो मैंने पहले कभी देखी भी नहीं थी. मैं रोज सुबह-शाम स्विमिंग के लिए जाती थी. इसके अलावा कई तरह के खेल, क्विज, नाटक जैसी गतिविधियां होती रहती थीं, जो मैं अपने स्कूल नवोदय विद्यालय, राजगीर में भी करती रही हूं."

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कैप्टन रितु ने कहा कि वह नाव के जरिए जहाज पर गईं. जब उन्होंने नाव से जहाज को देखा तो वह विशालकाय था. वह एक टैंकर जहाज था. बताया कि अपने पूरे करियर में टैंकर जहाजों पर ही उन्होंने काम किया है.

आगे कहा, "जहाज पर चढ़ते समय थोड़ी घबराहट भी हुई. जहाज पर पहुंचने के बाद लगा कि चलो, अब शुरुआत करनी है. उस समय यही सोच थी कि जहां भी जाऊंगी, अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी. कॉलेज में गईं, तब भी और पहला जहाज जॉइन किया, तब भी यही सोचा कि सबसे बेहतर बनना है. उस समय महिला होने को लेकर मन में ऐसा कोई भेदभाव नहीं था."

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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