बिहार के बांका से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया. दूसरे के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, पैन कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर पिछले करीब 32 वर्षों से शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंककर नौकरी कर रहे एक फर्जी शिक्षक को शुक्रवार (30 अक्टूबर, 2026) को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
जिला शिक्षा पदाधिकारी देवनारायण पंडित और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) संजय कुमार यादव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी किया. फर्जी शिक्षक की पहचान बाराहाट प्रखंड अंतर्गत प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में पदस्थापित सहायक शिक्षक मनोज कुमार के रूप में की गई है.
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब वर्तमान में झारखंड की राजधानी रांची (सीसीआर) में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार (पिता- भरत प्रसाद साह, मूल निवासी- असरगंज, मुंगेर एवं वर्तमान पता नाथनगर, भागलपुर) ने देवघर जिले के मोहनपुर थाना में कांड संख्या 216/23 दर्ज कराया. पुलिस निरीक्षक ने शिकायत में बताया था कि उनके नाम, परीक्षाफल, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर एक व्यक्ति फर्जी तरीके से बांका जिले में शिक्षक बनकर कार्यरत है.
दो परीक्षाओं में सफल हुए थे मनोज कुमार
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1994 में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा और दारोगा भर्ती परीक्षा दोनों में ही असली मनोज कुमार सफल हुए थे. उन्होंने शिक्षक पद को छोड़कर बिहार पुलिस सेवा में दारोगा के रूप में योगदान दे दिया.
इधर उनके द्वारा शिक्षक पद पर योगदान नहीं करने से रिक्त रह गई सीट पर फर्जी मनोज कुमार ने जालसाजी कर 26 सितंबर 1994 को अमरपुर के प्राथमिक विद्यालय गोरगामा में नियुक्ति पा ली. बाद में जुलाई 1995 में धोरैया के प्राथमिक विद्यालय सीताचक में योगदान करने के बाद वह वर्तमान में बाराहाट के प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में कार्यरत था.
मोहनपुर थाना के अनुसंधानकर्ता द्वारा वर्ष 2025 में इसकी सूचना बांका शिक्षा विभाग को दिए जाने के बाद विभाग ने दोनों पक्षों से मूल प्रमाण पत्रों की मांग की. जांच के दौरान पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार ने अपने सभी मूल (प्रथम) प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, जो पूरी तरह सही पाए गए. वहीं आरोपी शिक्षक ने बोर्ड से निर्गत द्वितीयक (डुप्लीकेट) प्रमाण पत्र जमा किए और वह वर्ष 1994 की बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के साथ-साथ मैट्रिक, इंटर व स्नातक का मूल प्रवेश पत्र भी प्रस्तुत नहीं कर सका.
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इसके बाद विभाग ने जुलाई 2026 में आरोपी शिक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करते हुए आरोप पत्र गठित किया और उसे कई बार सुनवाई के लिए बुलाया. खुद को फंसता देख आरोपी शिक्षक ने विभाग को गुमराह करने के लिए एक रजिस्टर्ड डाक भेजकर कोलकाता में इलाजरत होने का बहाना बनाया, लेकिन डाक की रसीद ने उसकी पोल खोल दी क्योंकि वह पत्र कोलकाता के बजाय बौंसी उप-डाकघर से ही भेजा गया था.
पुष्टि के बाद सेवा से किया गया बर्खास्त
माध्यमिक शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में जालसाजी और अवैध नियुक्ति की पुष्टि होने के बाद, शिक्षा विभाग ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली- 2005 के तहत कार्रवाई करते हुए फर्जी शिक्षक मनोज कुमार को शुक्रवार (30 अक्टूबर) को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है.
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