4 अक्टूबर 2026, 6:56 PM
हर खबर, हर पल
हमारे बारे मेंसंपर्क
राष्ट्रीय

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय क्यों हटाए गए?:आराधना ब्राह्मण चेहरा, अखिलेश से तालमेल अच्छा; मुस्लिमों को साधेंगे इमरान

यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने बड़ा सियासी दांव खेल दिया। अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को कमान सौंप दी। इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। देवेंद्र प्रसाद महरा और आलोक प्रसाद को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। चार नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने यूपी में 'ब्राह्मण

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय क्यों हटाए गए?:आराधना ब्राह्मण चेहरा, अखिलेश से तालमेल अच्छा; मुस्लिमों को साधेंगे इमरान
स्रोत: dainik bhasker category
शेयर करेंWhatsAppFacebook
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने बड़ा सियासी दांव खेल दिया। अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आराधना मिश्रा ‘मोना’ को कमान सौंप दी। इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। देवेंद्र प्रसाद महरा और आलोक प्रसाद को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। चार नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने यूपी में 'ब्राह्मण-मुस्लिम-ओबीसी-दलित' का एक नया और संतुलित समीकरण तैयार किया है। ये सिर्फ बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी की चुनावी रोड मैप है। नए चेहरे और संतुलन की रणनीति इमरान से मुस्लिम समीकरण का संतुलन देवेंद्र प्रसाद महरा के जरिए निषाद समाज में सेंधमारी आलोक प्रसाद से दलित नेतृत्व की मजबूती यूपी प्रभारी के दावे पर राहुल गांधी ने लगाई मुहर यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम हाईकमान के सामने सामाजिक समीकरण का हवाला दे चुके थे। उन्होंने तर्क दिया था कि अजय राय जिस भूमिहार समाज से आते हैं, उसकी आबादी प्रदेश में बेहद कम है। 2027 का चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है, जिसका वोटबैंक बड़ा और व्यापक हो। गौतम खुद दलित वर्ग से आते हैं। उनकी रणनीति है कि दलित-ब्राह्मण या दलित-ओबीसी के समीकरण से यूपी का किला फतह किया जाए। इसी फेरबदल में प्रमोद तिवारी की बेटी और विधायक आराधना मिश्रा के नाम पर मुहर लगी। यूपी प्रभारी से अलग लाइन खींचना पड़ा भारी अजय राय करीब 3 साल से प्रदेश अध्यक्ष थे। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा किया। कांग्रेस ने जब ब्राह्मण चेहरे अविनाश पांडेय की जगह दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी बनाया, इसके बाद से अजय राय और राजेंद्र पाल के अलग-अलग दावे सामने आने लगे। ऐसे 2 मामले पढ़िए- 1. सपा गठबंधन में सीटों को लेकर अलग-अलग दावे सपा के साथ सीट बंटवारे को लेकर भी कांग्रेस की रणनीति में उनकी सक्रियता बढ़ी। गौतम ने सपा के साथ बराबर सीटों पर बात करने की पैरवी की। जबकि, अजय राय लगातार यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर संगठन तैयार करने पर जोर देते रहे। 2. मायावती से मुलाकात की कोशिश पर राय की नाराजगी मई- 2026 में राजेंद्र पाल गौतम अचानक बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए। उनके साथ कांग्रेस के कुछ अन्य नेता और सांसद भी थे। हालांकि, मायावती ने उनसे मुलाकात नहीं की। इस पर अजय राय ने खुलेआम नाराजगी जताई थी। कहा था- मुझे इस बात की कोई खबर नहीं कि गौतम किसकी इजाजत से मायावती के घर गए? अजय राय का व्यक्तिगत प्रदर्शन काम नहीं आया 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए अजय राय को ही अध्यक्ष पद पर बनाए रखा। राय के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क यह है कि उनके नेतृत्व में पार्टी ने 6 लोकसभा सीटें जीतीं। उन्होंने खुद वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर दी थी। मतगणना के दौरान अलग-अलग चरण में कुल 7 राउंड में बढ़त भी बनाई थी। मगर पार्टी ने अजय राय के व्यक्तिगत प्रदर्शन को दरकिनार किया। ------------------- ये पढ़ें - यह खबर भी पढ़िए:- यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं आराधना मिश्रा 'मोना':अजय राय को हटाया; इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद-आलोक प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाया कांग्रेस नेतृत्व ने आराधना मिश्रा 'मोना' को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया है। पार्टी ने सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दो वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। गोरखपुर के देवेंद्र निषाद महरा और महराजगंज के आलोक प्रसाद को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस ने नियुक्ति में सोशल जातीय समीकरण साधा है। विधानसभा चुनाव से करीब तीन महीने पहले ब्राह्मण, अल्पसंख्यक (मुस्लिम), पिछड़े और दलित का दांव खेला है। पढ़ें पूरी खबर…
समाचार स्रोत

यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

मूल स्रोत देखें ↗