यूपी भाजपा ने पुराने चेहरे बदले, नए पर भरोसा किया:राज्यसभा चुनाव में ब्राह्मण, पिछड़े, दलित पर दांव, 2027 की बिसात
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के जरिए मिशन- 2027 की जातीय बिसात बिछा दी है। पार्टी ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, पिछड़ा और दलित वर्ग में परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा किया है। लेकिन, पुराने चेहरों पर दांव खेलने की जगह नए चेहरों को मौका दिया है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पूंजीपति संजय सेठ को 9वां प्रत्याशी बनाने का जोखिम लिया था। लेकिन, विधा

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के जरिए मिशन- 2027 की जातीय बिसात बिछा दी है। पार्टी ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, पिछड़ा और दलित वर्ग में परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा किया है। लेकिन, पुराने चेहरों पर दांव खेलने की जगह नए चेहरों को मौका दिया है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पूंजीपति संजय सेठ को 9वां प्रत्याशी बनाने का जोखिम लिया था। लेकिन, विधानसभा चुनाव नजदीक होने के चलते इस बार किसी पूंजीपति और बड़े चेहरे को मौका नहीं दिया है। इसकी जगह अपने सामान्य कार्यकर्ता और मूल कैडर को ही आगे बढ़ाया है। दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- 2 महिलाओं को टिकट देकर बढ़ाया भरोसा 8 राज्यसभा प्रत्याशियों में दो महिलाओं (25 फीसदी) को टिकट देकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संकल्प के करीब पहुंचने की कोशिश की है। दलित वोट को साधने के लिए 2020 की तुलना में एक दलित प्रत्याशी बढ़ाया है। इनमें भी पासी और खटिक समाज, जो भाजपा कावोट बैंक माना जाता है, उन्हें ही मौका दिया है। वहीं, ब्राह्मणों की संख्या 2 बरकरार रखी है। पिछड़े वर्ग में कुर्मी, पाल (गड़रिया) और लोधी समाज को भाजपा का वोटबैंक माना जाता है। इन तीनों जातियों के ही कार्यकर्ताओं को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। धर्मपाल सिंह का कद बढ़ा यूपी के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह का यूपी की राजनीतिक के साथ लोध समाज में कद बढ़ेगा। धर्मपाल सिंह 2016 और 2025 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन, जातीय समीकरण के चलते उन्हें अध्यक्ष बनने का मौका नहीं मिला। पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया इसलिए अब राज्यसभा भेजा जा रहा है। अब धर्मपाल सिंह आने वाले दिनों में केंद्र सरकार में मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाएंगे। धर्मपाल सिंह वर्तमान में 73 साल के हैं, वह 79 साल की उम्र तक (अगले 6 साल) राज्यसभा के सदस्य रहेंगे। धर्मपाल सिंह लोधी समाज के दूसरे नेता राजबीर सिंह राजू भैया और बीएल वर्मा से उम्र में बड़े हैं, पार्टी ने उनका कद भी बढ़ाकर साफ संकेत दिया है कि लोध समाज में धर्मपाल ही भाजपा का चेहरा हैं। भरोसे पर खरे उतरे राम प्रताप भाजपा के प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान 2022 में आगरा की एत्मादपुर सीट से चुनाव हार गए थे। पार्टी ने हाल ही में उन्हें फिर से प्रदेश महामंत्री और पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाया था। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाए जाने से साफ हो गया था कि उन्हें विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के सबसे करीबी राम प्रताप सिंह को कार्यालय में लगातार सक्रिय रहने और ब्रज क्षेत्र में ठाकुर समाज के नए चेहरे के रूप में स्थापित करने के लिए प्रत्याशी बनाया है। इनको तीसरी बार मौका नहीं दिया भाजपा के पदाधिकारी बताते हैं- केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है कि जिन्हें दो या दो से अधिक बार राज्यसभा सदस्य बनाया गया है, उन्हें पार्टी अब राज्यसभा नहीं भेज रही। बल्कि, विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दे रही है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर और अरुण सिंह का टिकट इसी फार्मूले से कटा है। अरुण सिंह को बीते दिनों भाजपा की राष्ट्रीय टीम में भी जगह नहीं मिली थी। ये नेता असर नहीं दिखा सके राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- भाजपा ने 2020 में दलित वर्ग से ब्रजलाल, ब्राह्मण समाज से सीमा द्विवेदी, ठाकुर समाज से नीरज शेखर और अरुण सिंह, शाक्य समाज से गीता शाक्य और लोधी समाज से बीएल वर्मा को राज्यभा भेजा था। लेकिन 2022 और 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि ये नेता अपने क्षेत्र और समाज में पार्टी की उम्मीद पर खरे नहीं उतरे। नीरज शेखर खुद बलिया से चुनाव हार गए। दलितों में ब्रजलाल का खास असर नहीं दिखा। दलित (जाटव) वोट सपा को शिफ्ट होने लगा। सीमा द्विवेदी खुद जौनपुर और आसपास के इलाके में आपसी गुटबाजी और विवादों में घिर गईं। अरुण सिंह के मिर्जापुर जिले में भी भाजपा की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं रही। भाजपा ने 2022 और 2024 चुनाव का आकलन करने के बाद तय इन चेहरों की जगह नए चेहरों को मौका देने का निर्णय किया। ठाकुरों की नाराजगी बनी चुनौती भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में ठाकुर प्रतिनिधियों की संख्या दो से घटाकर एक कर दी है। पहले अरुण सिंह और नीरज शेखर ठाकुर समाज से राज्यसभा सदस्य थे। इस बार केवल राम प्रताप सिंह चौहान को टिकट दिया गया है। उधर, विधान परिषद चुनाव में भी भाजपा ने 11 सीटों में 5 ब्राह्मण उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं, ठाकुर समाज से केवल वाराणसी स्नातक खंड से भाजपा के केदार नाथ सिंह और आगरा खंड स्नातक से मानवेंद्र सिंह प्रत्याशी हैं। उधर, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ताओं में भी 32 में से 10 ब्राह्मण और 4 ठाकुर हैं। हालांकि, विधान परिषद में मौजूदा 99 सदस्यों में से 24 ठाकुर हैं। इनमें 22 भाजपा के हैं। लेकिन, ठाकुरों का प्रतिनिधित्व कम होने से समाज के नेताओं में नाराजगी है। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को फटकारा, कहा- आपको पता होना चाहिए कब मुंह खोलना है, आपकी जगह जेल में है चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट के आदेश के बावजूद 5 करोड़ रुपए जमा नहीं करने पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।" पढ़ें पूरी खबर…
समाचार स्रोत
यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
मूल स्रोत देखें ↗
