राममंदिर चढ़ावा चोरी केस:एंटी करप्शन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, चंपत राय-अनिल मिश्र और गोपाल राव सरकारी गवाह बने
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण में पुलिस ने बुधवार को विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन की अदालत में 36,039 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट चार बड़े बक्सों और दो गत्तों में भरकर अदालत पहुंचाई गई। इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव क

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण में पुलिस ने बुधवार को विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन की अदालत में 36,039 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट चार बड़े बक्सों और दो गत्तों में भरकर अदालत पहुंचाई गई। इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और निर्माण प्रभारी गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। तीनों को पुलिस ने गवाह बनाया है। चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख है। इसमें 59 पन्नों का आरोपपत्र और 101 केस डायरी के पर्चे भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित दूसरी एसआईटी की 90 दिन की समय सीमा पूरी होने के बाद पुलिस ने यह चार्जशीट दाखिल की है। 4 बक्सों में भरकर अदालत पहुंची चार्जशीट बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह और विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी बुधवार सुबह पुलिस टीम के साथ कचहरी पहुंचे। करीब पांच इंस्पेक्टर और 12 उप निरीक्षकों समेत पुलिस बल मौजूद रहा। चार्जशीट चार बड़े बक्सों और दो गत्तों में भरकर लाई गई। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में दस्तावेजों का मिलान और जांच शुरू की गई। इसकी जानकारी मिलते ही कचहरी परिसर में हलचल बढ़ गई। चंपत राय समेत 3 को बनाया गवाह चार्जशीट में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिस ने तीनों को मामले में गवाह बनाया है। चार्जशीट में कुल 133 गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं। कुछ अधिवक्ताओं ने विवेचना और कुछ लोगों को आरोपी नहीं बनाए जाने पर आपत्ति जताई। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट के बाहर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। स्थिति को देखते हुए कचहरी परिसर में पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। दो ट्रक पीएसी भी तैनात रही। 7 अक्टूबर को रिमांड पर सुनवाई मामले में अधिवक्ता संघ की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र का अदालत ने निस्तारण कर दिया। अदालत के अनुसार विवेचना में शामिल किए जाने के लिए अधिवक्ताओं की ओर से दिए गए शपथपत्रों के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसके आधार पर प्रार्थना पत्र निस्तारित कर दिया गया। अब मामले में रिमांड पर अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। 4 जून को सामने आया था मामला राम मंदिर चढ़ावा धनराशि प्रकरण की शुरुआत 4 जून को हुई थी। उस समय गणना कक्ष में नकदी छिपाने का मामला सामने आया था। इसके बाद जांच की मांग की गई और रिपोर्ट तलब की गई। 13 जून को पहली एसआईटी गठित हुई। एसआईटी ने 15 जून से ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। 16 से 19 जून तक ट्रस्ट के दस्तावेज, बैंक अधिकारियों और नोट गिनने वाली एजेंसी के प्रतिनिधियों से भी जानकारी ली गई। 23 जून को पहली एसआईटी ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को करीब 20 पन्नों की प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें 27 अप्रैल से 5 जून के बीच 42 दिनों में करीब 70 संदिग्ध चोरी की घटनाओं के सीसीटीवी साक्ष्य मिलने की बात सामने आई थी।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
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