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'रामायण' को कैसे मिला था 'रावण'? पहले 'केवट' बनने वाले थे अरविंद त्रिवेदी, फिर ऐसे पलटी किस्मत

रामायण...साल 1987 में आए इस ऐतिहासिक धारावाहिक ने भारतीय टीवी इतिहास पर सारे रिकॉड ध्वस्त कर दिए थे. रामायण को आज करीब चार दशक के बाद भी दर्शकों का काफी प्यार मिलता है. रामानंद सागर के डायरेक्शन में बने धारावाहिक रामायण ने ऐसी अमिट और गहरी छाप दर्शकों के दिलों में छोड़ी कि

'रामायण' को कैसे मिला था 'रावण'? पहले 'केवट' बनने वाले थे अरविंद त्रिवेदी, फिर ऐसे पलटी किस्मत
स्रोत: abp news world
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रामायण...साल 1987 में आए इस ऐतिहासिक धारावाहिक ने भारतीय टीवी इतिहास पर सारे रिकॉड ध्वस्त कर दिए थे. रामायण को आज करीब चार दशक के बाद भी दर्शकों का काफी प्यार मिलता है. रामानंद सागर के डायरेक्शन में बने धारावाहिक रामायण ने ऐसी अमिट और गहरी छाप दर्शकों के दिलों में छोड़ी कि हर कोई इसकी तरफ खींचा चला आता था.

रामायण में भगवान श्री राम, माता सीता, हनुमान जी और लक्ष्मण जी का किरदार निभाने वाले कलाकारों को बड़ी और खास पहचान मिली थी. वहीं रामायण में रावण बनकर अभिनेता अरविंद त्रिवेदी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया था. उन्होंने लक्ष्मण का किरदार अमर कर दिया. आइए आज अरविंद त्रिवेदी की डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानते हैं कि आखिर उन्हें रावण का किरदार कैसे मिला था? जबकि पहले वो केवट बनने वाले थे.

इंदौर में हुआ था जन्म

अरविंद त्रिवेदी का जन्म मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 8 नवंबर 1938 को हुआ था. वैसे तो उन्हें रामायण में रावण के किरदार से देशभर में काफी पॉपुलैरिटी मिली थी, लेकिन आपको बता दें कि वो गुजराती सिनेमा के दिग्गज एक्टर भी थे. उन्होंने गुजराती सिनेमा में चार दशक तक काम किया था.

300 लोगों को मात देकर बने थे 'रावण'

अब बात करते हैं उस किरदार के बारे में जिसके चलते अरविंद त्रिवेदी हमेशा से ही चर्चा में रहे. अरविंद ने एक बातचीत के दौरान बताया था कि पहले वो रामायण के केवट बन सकते थे. दरअसल उन्होंने पहले केवट के रोल के लिए ऑडिशन दिया था जो कि रामानंद सागर ने लिया था. 

बताया जाता है कि रामानंद सागर जब केवट के किरदार के लिए अरविंद का ऑडिशन ले रहे थे तब उन्हें ये महसूस हुआ था कि वो रावण के रोल में ज्यादा फिट बैठेंगे. क्योंकि उनकी बॉडी लैंग्वेज उन्हें रावण के रोल के लिए ठीक-ठाक लगी. ऐसे में उन्होंने उन्हें केवट के किरदार के लिए न चुनकर लंकापति रावण के रोल के लिए चुन लिया था. 

हालांकि आपको बता दें कि रावण के रोल के लिए रामानंद सागर पहले 300 कलाकारों का ऑडिशन ले चुके थे, लेकिन किसी ने भी उन्हें प्रभावित नहीं किया. आखिरकार रावण के रोल के लिए उन्होंने अरविंद त्रिवेदी के नाम पर मुहर लगाई और फिर जो हुआ वो इतिहास का हिस्सा बन गया.

रावण बनने में होती थी इतनी परेशानी

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में ही अरविंद ने खुलासा किया था कि रावण के किरदार में आने के लिए उन्हें घंटों मेहनत करनी पड़ती थी. उन्हें रावण का गेटअप लेने में पांच घंटे तक लग जाते थे. भारी भरकम कॉस्ट्यूम और दस किलो तक का मुकुट पहनना पड़ता था. 

भगवान राम और शिव की पूजा करके सेट पर जाते थे अरविंद

चाहे रामायण में रावण बनकर अरविंद त्रिवेदी महफ़िल लूट लेते थे, लेकिन असल जिंदगी में वो धार्मिक व्यक्ति थे. वो हर दिन शूट पर जाने से पहले भगवान श्री राम और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते थे. वहीं जब वो शूटिंग में भगवान राम के खिलाफ रावण के किरदार के रूप में कुछ बोलते थे तो बाद में भगवान से माफी भी मांगते थे.

जब हेमा मालिनी को अरविंद त्रिवेदी ने मारे 20 थप्पड़

न सिर्फ टीवी पर और गुजराती सिनेमा में बल्कि अरविंद त्रिवेदी ने हिंदी सिनेमा में भी काम किया था. वो हेमा मालिनी जैसी दिग्गज अदाकारा के साथ भी स्क्रीन शेयर कर चुके थे. हेमा के साथ उन्होंने साल 1979 में आई फिल्म 'हम तेरे आशिक हैं' में काम किया था.

इस फिल्म में एक सीन में अरविंद ने हेमा को थप्पड़ रसीद किया था. इस किस्से को लेकर रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने अपने एक इंटरव्यू में बातचीत करते हुए कहा था कि हेमा मालिनी जैसी बड़ी एक्ट्रेस को थप्पड़ मारने में अरविंद त्रिवेदी डर रहे थे. इस वजह से इस शॉट के पूरे 20 टेक हुए थे. बाद में प्रेम सागर और हेमा मालिनी ने अरविंद से कहा था कि वो ये भूल जाए कि वो बड़ी एक्ट्रेस है. इसके बाद उस सीन को करने में अरविंद सहज हुए.

BJP से सांसद भी रहे थे अरविंद

अरविंद त्रिवेदी ने राजनीति में भी हाथ आजमाया था. अभिनेता ने भाजपा के टिकट पर गुजरात के साबरकांठा सीट से चुनाव लड़ा था और वो 1991 से 1996 तक सांसद रहे थे. उनका 6 अक्टूबर 2021 को 84 साल की उम्र में निधन हो गया था.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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