2 अक्टूबर 2026, 3:31 PM
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लोग बोले- दिव्या मित्तल सपा से चुनाव लड़ें:मिर्जापुर से करें तैयारी; जानिए भास्कर पोल में पाठकों की राय

IAS रहीं दिव्या मित्तल राजनीति में एंट्री करने वाली हैं। उनके इस ऐलान के बाद से ही लोग चर्चा कर रहे हैं कि वे किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ेंगी? इसे लेकर दैनिक भास्कर ने अपने पाठकों से 2 सवाल पूछे थे। पहला सवाल- दिव्या मित्तल को राजनीति में सबसे ज्यादा सफलता किस पार्टी के साथ मिल सकती है? इसके 4 विकल्प दिए गए थे- भाजपा, सपा,

लोग बोले- दिव्या मित्तल सपा से चुनाव लड़ें:मिर्जापुर से करें तैयारी; जानिए भास्कर पोल में पाठकों की राय
स्रोत: dainik bhasker category
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IAS रहीं दिव्या मित्तल राजनीति में एंट्री करने वाली हैं। उनके इस ऐलान के बाद से ही लोग चर्चा कर रहे हैं कि वे किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ेंगी? इसे लेकर दैनिक भास्कर ने अपने पाठकों से 2 सवाल पूछे थे। पहला सवाल- दिव्या मित्तल को राजनीति में सबसे ज्यादा सफलता किस पार्टी के साथ मिल सकती है? इसके 4 विकल्प दिए गए थे- भाजपा, सपा, राजा भैया की पार्टी और निर्दलीय। सबसे ज्यादा 30% पाठकों ने सपा का विकल्प चुना। यानी हर 10 में से करीब 3 पाठकों ने माना कि दिव्या मित्तल को सपा के साथ राजनीति में जाना चाहिए। भाजपा दूसरे नंबर पर रही। उसे 28% वोट मिले। निर्दलीय चुनाव लड़ने के विकल्प को भी 28% लोगों ने चुना। वहीं, 14% पाठकों ने राजा भैया की पार्टी के साथ जाने का विकल्प चुना। यानी सपा और भाजपा के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 2% रहा। निर्दलीय विकल्प को भी भाजपा के बराबर वोट मिले। दिलचस्प बात यह है कि दिव्या मित्तल किसी पार्टी के साथ जाने के बजाय ‘जनता की आवाज’ के रूप में राजनीति शुरू करने की बात कह चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि वे जनता के साथ मिलकर अपनी राजनीतिक राह तय करेंगी। दूसरा सवाल- दिव्या मित्तल को किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहिए? इसमें मिर्जापुर, चुनार, लखनऊ और वाराणसी के विकल्प दिए गए थे। मिर्जापुर को लेकर पाठकों की राय बाकी विकल्पों से काफी आगे रही। 81% लोगों ने कहा कि दिव्या मित्तल को मिर्जापुर से चुनाव लड़ना चाहिए। चुनार के पक्ष में 8% वोट मिले। लखनऊ को 6% और वाराणसी को सिर्फ 5% लोगों ने चुना। यानी मिर्जापुर को मिले वोट बाकी तीनों विकल्पों के कुल वोट से भी कई गुना ज्यादा रहे। इसके पीछे दिव्या मित्तल का मिर्जापुर से जुड़ा प्रशासनिक कार्यकाल भी एक वजह माना जा सकता है। दिव्या सितंबर, 2022 में मिर्जापुर की डीएम बनी थीं। वहां ग्रामीण इलाकों में जन-चौपाल और पीने के पानी से जुड़े कामों को लेकर उनकी चर्चा हुई थी। लहुरियादह गांव में पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की पहल भी उनके कार्यकाल में हुई थी। मिर्जापुर से तबादले के बाद भी उनकी विदाई चर्चा में रही। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में उन्हें विदाई दी गई थी। इसके बाद देवरिया में भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा। वहां जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच अधिकारों को लेकर हुई बहस ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया। 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त, 2026 को इस्तीफा दिया था। 29 सितंबर को उन्होंने साफ किया कि वे राजनीतिक में आ रही हैं। ------------------------------ यह खबर भी पढ़ें… IAS दिव्या ने जिस गांव में पानी पहुंचाया-वहां हालात कैसे, टैंकर के पानी के लिए राशन कार्ड दिखाना पड़ता था ‘जब से पैदा हुए हैं, झरने और टैंकर से पानी लेते आए। दिव्या मित्तल हमारे लिए भगवान बनकर आईं। उन्होंने हमारे गांव में पानी पहुंचा दिया।’ यह कहना है मिर्जापुर के लहुरियादह गांव के राकेश यादव का । उनकी तरह गांव के करीब 90% लोग मानते हैं कि पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने उनके गांव की किस्मत बदल दी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
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