‘लड़कों से बात करती है, गलत जा रही है’:घरवालों ने खेल छुड़वाया, कोच के जूते पहनकर भी दौड़ीं; जानें गोल्ड मेडलिस्ट किरण की कहानी
हरियाणा के सोनीपत की एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर जीतकर सुर्खियों में आ गईं। किरण 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेंगी। यहां उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। गन्नौर के गांव गुमड़ से शुरू हुआ उनका सफर मुश्किलों से भरा रहा। प्रैक्टिस के दौरान गांव के एक व्यक्ति ने पिता-चाचा से शिकायत कर

हरियाणा के सोनीपत की एथलीट किरण पहल मंगलवार को एशियन गेम्स के रिले इवेंट में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर जीतकर सुर्खियों में आ गईं। किरण 1 अक्टूबर को गांव पहुंचेंगी। यहां उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। गन्नौर के गांव गुमड़ से शुरू हुआ उनका सफर मुश्किलों से भरा रहा। प्रैक्टिस के दौरान गांव के एक व्यक्ति ने पिता-चाचा से शिकायत कर दी कि किरण लड़कों से बात करती हैं और गलत रास्ते पर जा रही हैं। परिवार ने खेल छुड़वा दिया, लेकिन पांच महीने बाद किरण ने उन्हें मनाकर दोबारा मैदान पर वापसी की। किरण की बहन तमन्ना ने बताया कि ओपन नेशनल चैंपियनशिप के दौरान किरण के पास स्पाइक्स (जूते) नहीं थे। इनकी कीमत करीब 22 हजार रुपए थी। कहीं से स्पॉन्सर भी नहीं मिला। आखिर में किरण ने कोच के स्पाइक्स पहनकर दौड़ लगाई। इसके बावजूद उन्होंने उस चैंपियनशिप में मेडल हासिल किया। 2022 में पिता ओमप्रकाश की बीमारी के दौरान उन्होंने प्रैक्टिस छोड़कर उनकी देखभाल की। पिता ने ओलिंपिक मेडल का सपना पूरा करने को कहा तो किरण ने वादा किया, लेकिन उसी साल उनका निधन हो गया। पिता से किया यह वादा ही किरण की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने किरण पहल से वीडियो कॉल पर बात की। किरण ने कहा कि मेडल के लिए बहुत मेहनत की थी। अब अगला टारगेटा वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2028 के ओलिंपिक गेम्स हैं। हरियाणवी छोरी के गोल्डन गर्ल बनने की पूरी कहानी… खेल के मैदान में आईं हर मुश्किलों से लड़कर पाया मुकाम… बहन बोलीं- चने के लड्डू पसंद, ओलिंपिक में भी साथ ले गई थी किरण की बहन तमन्ना ने बताया कि वह काफी आध्यात्मिक हैं और खेल को लेकर पूरी तरह समर्पित रहती हैं। वह सामान्य तौर पर सुबह-शाम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करती हैं। बड़ी प्रतियोगिता होने पर वह बाकी चीजों को पीछे छोड़कर सिर्फ ट्रेनिंग पर ध्यान देती हैं। किरण को चने के लड्डू बेहद पसंद हैं। वह ओलिंपिक के दौरान भी अपने साथ घर के बने चने के लड्डू लेकर गई थीं। अब घर लौटने पर मां अपनी बेटी के लिए फिर से चने के लड्डू बनाएंगी। तमन्ना के मुताबिक, किरण 2023 तक पूरी तरह शाकाहारी थीं। पेरिस ओलिंपिक के दौरान पोलैंड में रहने पर उन्हें खाने को लेकर परेशानी हुई। वहां उपलब्ध भोजन में नॉनवेज अधिक होने के कारण डाइट संभालना मुश्किल हुआ। इसके बाद उन्होंने नॉनवेज खाना भी शुरू कर दिया। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…. जींद की नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड:उधार की गन से शुरू की थी प्रैक्टिस; राशन लेने गई मां को फोन पर मिली खुशखबरी जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में जींद के गांव संगतपुरा की 26 वर्षीय शूटर नीरू ढांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
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